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BS Manthan 2025: एक साल में 15 फीसदी चढ़ सकता है बाजार : क्रिस वुड

जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख क्रिस वुड ने गुरुवार को कहा कि भारत के शेयर बाजारों में हाल में गिरावट आई है और अल्पावधि से मध्यावधि में विदेशी पूंजी भारत के बजाय चीन की ओर जाने की संभावना है।

वुड ने नई दिल्ली में बिजनेस स्टैंडर्ड मंथन समिट में बताया कि वह दीर्घावधि के नजरिये से भारतीय शेयरों पर उत्साहित हैं। लेकिन एफआईआई की भारी निकासी और मूल्यांकन से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए वह अल्पावधि के लिहाज से सतर्क हैं। उनको उम्मीद है कि अगर एफआईआई फिर से भारत आते हैं तो प्रमुख भारतीय सूचकांक – सेंसेक्स और निफ्टी 12 महीने में मौजूदा स्तर से 10-15 प्रतिशत रिटर्न देंगे।

उन्होंने कहा, ‘अगर किसी का भारतीय शेयरों में कोई निवेश नहीं है तो उन्हें अब खरीदारी शुरू कर देनी चाहिए। जब हालात बदलेंगे तो तेजी बहुत ज्यादा होगी। इसके बावजूद, हम भारत में अभी भी ‘बढ़ते बाजार में बेचने’ की स्थिति में हैं, न कि ‘गिरावट में खरीदने’ की स्थिति में।’
ट्रैवल और टूरिज्म अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र के शेयरों में सितंबर 2024 से बड़ी गिरावट आई है, लेकिन वुड का कहना है कि उन्होंने अपने लॉन्ग ओनली इंडिया पोर्टफोलियो में इस क्षेत्र के लिए मौजूदा निवेश आवंटन में बदलाव नहीं किया है।

वुड ने कहा, ‘शीर्ष स्तरों पर भारतीय बाजारों का मूल्यांकन काफी ज्यादा था। लेकिन विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली ने मुझे अचरज में डाल दिया है। एफआईआई की बिकवाली का पहला चरण सस्ते चीनी बाजार की ओर फंड ले जाने से जुड़ा हो सकता है, जबकि बिकवाली का दूसरा दौर डीपसीक के दौरान सकारात्मक खबरों से जुड़ा हुआ है।’

चीन के स्टार्टअप डीपसीक ने अपने सस्ते आर्टीफिशल इंटेलीजेंस मॉडलों के लिए सुर्खियां हासिल की हैं और उसने टेक्नोलॉजी सेक्टर में आर्थिक ताकत का प्रदर्शन किया है।

कैलेंडर वर्ष 2025 में विदेशी निवेशकों ने अब तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के भारतीय शेयर बेचे हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों (म्युचुअल फंड समेत) ने 83,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

घरेलू प्रवाह ने देश के इक्विटी बाजारों को सहारा दिया है, लेकिन अगर स्थानीय निवेशकों के निवेश में सालाना आधार पर गिरावट देखने को मिली तो हालात बदल भी सकते हैं। निजी क्षेत्र से पूंजीगत व्यय में कमी की आशंका बढ़ रही है, जिसे बाजार ने नापसंद किया है।

सोना उस स्तर पर पहुंच रहा है जहां उसे 10 साल पहले होना चाहिए था। सोने की कीमत बढ़ने का एक कारण रूस द्वारा इस धातु के सुरक्षित भंडार को रोकना था। मजबूत अमेरिकी डॉलर भी सोने के लिए सेंटीमेंट में मदद कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘सोने के लिए अल्पावधि जोखिम रूस-यूक्रेन युद्ध का खत्म होना है। लेकिन यह अभी भी अच्छा दीर्घावधि दांव बना हुआ है। बिटकॉइन के भले ही 150,000 डॉलर के स्तर पर पहुंचने की संभावना है, लेकिन मैं फिर भी सोने में निवेश को प्राथमिकता दूंगा।’

अमेरिका-चीन संबंध

वुड ने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद चीन अपने बाजार में ‘आवक का सामान्यीकरण’ देख रहा है। पहले से ही सस्ते चीनी शेयर बाजार कैलेंडर वर्ष 2024 की चौथी तिमाही में नीचे आ गए। उस वक्त केंद्रीय बैंक ने मांग को स्थिर करने के लिए प्रोत्साहन पर जोर दिया (खासकर आवास क्षेत्र में) और साथ ही सरकार ने कंपनियों से अपने शेयर वापस खरीदने के लिए कहा।

उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि डॉनल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी से अमेरिका-चीन संबंध सुधरेंगे, खराब नहीं होंगे क्योंकि ट्रंप एक कारोबारी हैं, सुरक्षा मामलों के व्यक्ति नहीं। हालांकि, मेरा मानना है कि ट्रंप चीन या चीनी लोगों के विरोधी नहीं हैं।’

First Published - February 27, 2025 | 11:11 PM IST

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