हिंदी न्यूज़न्यूज़इंडियामहाकुंभ से लोगों को क्या मिला, गिद्ध और सुअर जैसे शब्दों का क्यों और किसके लिए हुआ इस्तेमाल?
Mahakumbh Politics: गिद्ध और सुअर जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके CM योगी ने विपक्ष पर तगड़ा प्रहार किया था. उनके शब्दों पर विवाद हुआ, लेकिन उन्होंने 24 घंटे बाद एक फिर से सदन में वो ही शब्द दोहराए.
By : एबीपी न्यूज़ टीवी | Edited By: हर्षित गौतम | Updated at : 26 Feb 2025 08:00 AM (IST)
यूपी में क्यों मचा घमासान?
Mahakumbh 2025 Yogi Remarks Row: महाशिवरात्रि के मौके पर स्नान के साथ ही आस्था के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन का समापन हो जाएगा, लेकिन महाकुंभ पर शुरू हुई राजनीति चलती रहेगी. वो राजनीति जो कुंभ के आगाज के साथ शुरू हुई थी और आखिर तक गिद्ध और सुअर जैसे शब्दों तक पहुंच गई. 13 जनवरी को जब कुंभ मेला शुरू हुआ तो योगी सरकार ने 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान जताया था, लेकिन अब तक प्रयागराज के संगम में 64 करोड़ से ज्यादा लोग आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। औसत की बात करें तो हर रोज कुंभ में करीब डेढ़ करोड़ लोगों ने डुबकी लगाई है और मंगलवार को जब सीएम योगी आदित्यनाथ विधान परिषद में कुंभ पर बोलने के लिए खड़े हुए तो वो उन आंकड़ों के साथ गरज रहे थे कि कैसे उनकी सरकार ने संगम को लेकर खाई सौगंध को पूरा किया है.
महाकुंभ के आयोजन का ये वो संक्षिप्त विश्लेषण है. गिद्ध और सुअर जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तगड़ा प्रहार किया था. उनके शब्दों पर विवाद हुआ, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने 24 घंटे बाद एक फिर से सदन में वो ही शब्द दोहराए. गिद्ध और सुअर जैसे शब्दों का इस्तेमाल योगी आदित्यनाथ ने क्यों किया ये हम आपको बताएंगे, लेकिन पहले उन पहलुओं की बात कर लेते हैं कि महाकुंभ में लोगों को और क्या-क्या मिला?
आस्थावानों को महाकुंभ में पुण्य मिला
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आस्थावानों को महाकुंभ में पुण्य मिला. मध्य प्रदेश के कटनी से लेकर बिहार के आरा और सासाराम तक ट्रेन में सवार होने की होड़ मची रही, क्योंकि हर कोई स्नान करके कुंभ का पुण्य कमा लेना चाहता था. ट्रेन में पैर रखने की जगह नहीं मिली, लेकिन हिंदुस्तान के कोने-कोने से श्रद्धालु हर कीमत पर कुंभ में डुबकी लगाने के लिए पहुंचना चाहते थे. इसीलिए 13 जनवरी को शुरू हुए महाकुंभ में अब तक 64 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं जो एक विश्व कीर्तिमान बन चुका है.
हर कोई खुद को शुद्ध करने पहुंचा
64 करोड़ लोगों को किसी एक शहर के एक हिस्से में जाकर डुबकी लगाना वाकई अजूबा है और जो बचे हैं वो भी इसमें किसी भी कीमत पर शामिल हो जाना चाहते हैं. आस्थावानों को पुण्य मिला.. शायद इसीलिए देश और दुनिया के तमाम बड़े चेहरों ने बारी-बारी आकर संगम में डुबकी लगाई. फिर चाहे लंबे वक्त से सुर्खियों से दूर रहीं नुपूर शर्मा हो या फिर देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी. चेहरा चाहे राजनीति से ताल्लुक रखता हो या फिर फिल्म जगत से. हर कोई गंगा मैया के जल से खुद को शुद्ध करने पहुंचा.
महाकुंभ से लोगों को क्या मिला?
आस्थावानों को पुण्य के साथ महाकुंभ में और क्या मिला? योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि कुंभ में गरीबों को रोजगार मिला. अब सवाल ये है कि कुंभ की वजह से यूपी 3 लाख करोड़ की ग्रोथ करने वाला है तो कैसे? महाकुंभ में आने वाले नाव की सवारी कर रहे हैं तो नाविकों को रोजगार मिला. भक्त प्रसाद, फूल, माला, मूर्ति खरीद रहे हैं तो दुकानों का रोजगार बढ़ा. लोग, होटल, गेस्टहाउस और धर्मशाला में रुक रहे हैं तो स्थानीय होटल कारोबारियों का व्यवसाय बढ़ा. खाने के लिए दुकान और होटलों में गए तो आमदनी बढ़ी. निजी वाहन से आने वालों ने पार्किंग का इस्तेमाल किया तो स्थानीय लोगों के लिए नौकरी से लेकर राजस्व तक बढ़ा.
अखिलेश करते रहे वार, योगी का आता रहा पलटवार
अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक महाकुंभ में करीब 8 से 10 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई थी. इन्ही सब वजहों से ये भारत में अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक आयोजन बन गया है. हालांकि अखिलेश यादव महाकुंभ में कारोबार का आंकड़ा बताने पर योगी सरकार पर वार किया. दरअसल महाकुंभ में योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच वॉक युद्ध शुरू से चलता चला आ रहा है और योगी ने अखिलेश के हमलों का जवाब सनातनी तरीके से दिया. सीएम योगी का ये सिर्फ एक बयान नहीं है. बीजेपी के तमाम नेता और योगी ने बार-बार महाकुंभ में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के डुबकी लगाने की बात को दोहराया है कि कुंभ के आयोजन पर प्रहार करने वाले भी स्नान के लिए सबसे आगे खड़े थे. दरअसल अखिलेश यादव ने शुरुआत से ही कुंभ आयोजन की कमियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था.
अखिलेश यादव ने लगाए थे आरोप
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कुंभ के आयोजन में कई तरह की कमियों का आरोप लगाया है. अखिलेश यादव का दावा है कि तैयारी में 15 हजार करोड़ खर्च किए गए, लेकिन श्रद्धालुओं को अव्यवस्था की वजह से परेशान होना पड़ा. अखिलेश ने 100 करोड़ लोगों की व्यवस्था वाले बयान पर वार करते हुए कहा कि अगर व्यवस्था थी तो ट्रैफिक जाम में फंसने से लेकर भगदड़ पर सरकार आंकड़ा क्यों नहीं बता रही है? जबकि बीजेपी का दावा है कि ये अब तक सबसे सफल कुंभ है. जितना अनुमान लगाया गया था उससे ज्यादा भीड़ कुंभ तक पहुंची है और इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि ट्रैफिक जाम और घाट तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, लेकिन आस्था के उल्लास में ये परेशानियां काफी पीछे छूट गईं. ट्रैफिक जाम और यात्रियों की मुश्किल के बाद विपक्ष ने कुंभ में मची भगदड़ पर सरकार को घेरा.
इसलिए योगी ने किया गिद्ध और सुअर शब्द का इस्तेमाल
इन्हीं आरोपों को लेकर योगी आदित्यनाथ ने गिद्ध शब्द का इस्तेमाल किया था. योगी का इशारा समाजवादी पार्टी की तरफ था कि वो लोग इंतजार में थे कि हादसा हो और लाशें गिनकर हमला किया जा सके और फिर भगदड़ के बाद गंगाजल की शुद्धता के मुद्दे ने तूल पकड़ा. दरसअल संगम के जल पर संग्राम सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था, जिसमें कहा गया है कि स्नान वाली जगह से लिए गए ज्यादातर सैंपल में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया यानी मल मूत्र वाली गंदगी तय मानकों से बहुत ज्यादा मिली है. जबकि योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश प्रॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि पानी बिल्कुल साफ है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेबसाइट पर जो ताजा रिपोर्ट आई है, उसमें फीकल कॉलीफॉर्म समेत प्रदूषण के दूसरे तत्व भी तय मानक के भीतर हैं यानि अब यूपी और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड दोनों ही कह रहे हैं कि गंगा का पानी साफ है.
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Published at : 26 Feb 2025 07:57 AM (IST)
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रुमान हाशमी, वरिष्ठ पत्रकार
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